रविवार, 27 सितंबर 2009

माँ दुर्गा के नाम संदेश


माँ आप आएं इसके लिए शुक्रिया हम सब आपके आने का इंतजार बहुत बेसब्री से करते हैं

हमें आशा रहती है कि जब आप आयेगीं तब सारे दुःख हर लेगीं और हमें सुख़ और शातिं प्रदान करेगीं

माँ हम सब आपको बहुत प्यार करते हैं। अगर ग़लती से भी आपके बच्चों से भूल चूक हो जाये तो हे देवी माँ माफ कर देना हम सब आपके बच्चे हैं आपका प्यार और आर्शीवाद चाहते हैं

माँ दुर्गे आप सब कुछ जानतीं हैं आपसे क्या छिपा है। हे देवी मेरी आपसे एक प्रार्थना है।

मैं आपसे किसी के स्वास्थ्य के लिए आर्शीवाद माँग रही हूँ

देवी उस बच्चे की रक्षा करना। उस पर अपनी कृपा द्रष्टि करना

उसके सारे तकलीफ हर लेना देवी

माँ उस बच्चे को आपके आशीर्वाद की बहुत ज़रुरत है।

उसके परिवार वालों को हिम्मत और इस दुखद समय से लड़ने की शक्ति देना।

मैं जानती हुं माँ कि आप मेरी इच्छा जरुर पूरी करेगीं।

इस विशवास की लाज रखना देवी।

आप तो सब जानती हैं माँ

सब के दिल मे रहती हैं

मेरे मन की भी बाते जान रही हैं

मैं बस उस बच्चे की कुशलता चाह रही हूँ

मेरी यह ईच्छा पूरी कर देना माँ


शनिवार, 26 सितंबर 2009

बचपन

अमीर आदमी का बचपन, ज़वानी और बुढ़ापा सब अच्छा होता है

पर एक ग़रीब आदमी के लिए उसका बचपन जवानी और बुढ़ापा

सब एक समान होता है।

गरीब आदमी का बचपन, जवानी, बुढ़ापा सब काम करते गुज़रता है।

उसकी जवानी कब आती है कब जाती है पता ही नहीं चलता

वह न अपना बचपन जी पाता है न ही जवानी का आनन्द ले पाता है।

और बुढ़ापा तो वह जी ही नही पाता उसका बुढ़ापा आने से पहले ही वह इस दुनियाँ से चला जाता हैं।

वहीं अमीर आदमी का बचपन क्या मजे सें कटती है

वह अपना बचपन जी ही रहा होता है कि उसकी जवानी कब आ जाती है पता ही नहीं

चलता बुढ़ापा भी उसका सूरक्षित ही रहता है

अमीर और गरीब में कितना फ़र्क है दोनो में जमीन आसमान का अंतर है।

एक सेवा करता है दूसरा सेवा करवाता है।

एक शोषण करता है दूसरे का शोषण होता है

एक के पास खाना इतना होता है कि वह पूरा खा भी नहीं पाता

दूसरे के पास इतना कम होता है कि उसे भर पेट नहीं मिल पाता

एक फेकता है तो दूसरा चुनता है