शनिवार, 26 सितंबर 2009

बचपन

अमीर आदमी का बचपन, ज़वानी और बुढ़ापा सब अच्छा होता है

पर एक ग़रीब आदमी के लिए उसका बचपन जवानी और बुढ़ापा

सब एक समान होता है।

गरीब आदमी का बचपन, जवानी, बुढ़ापा सब काम करते गुज़रता है।

उसकी जवानी कब आती है कब जाती है पता ही नहीं चलता

वह न अपना बचपन जी पाता है न ही जवानी का आनन्द ले पाता है।

और बुढ़ापा तो वह जी ही नही पाता उसका बुढ़ापा आने से पहले ही वह इस दुनियाँ से चला जाता हैं।

वहीं अमीर आदमी का बचपन क्या मजे सें कटती है

वह अपना बचपन जी ही रहा होता है कि उसकी जवानी कब आ जाती है पता ही नहीं

चलता बुढ़ापा भी उसका सूरक्षित ही रहता है

अमीर और गरीब में कितना फ़र्क है दोनो में जमीन आसमान का अंतर है।

एक सेवा करता है दूसरा सेवा करवाता है।

एक शोषण करता है दूसरे का शोषण होता है

एक के पास खाना इतना होता है कि वह पूरा खा भी नहीं पाता

दूसरे के पास इतना कम होता है कि उसे भर पेट नहीं मिल पाता

एक फेकता है तो दूसरा चुनता है

11 टिप्‍पणियां:

  1. बिलकुल सही कहा आपने विजयदशमी की शुभकामनायें

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  2. आप बहुत सही फरमा रही है.. आपका स्वागत है आप खूब लिखें और बेहतर लिखें..
    गरीब का बच्चा पहले चाहता है की वो किसी भी तरह से अपनी पढाई पूरी कर ले .
    फिर चाहता है की कोई नोकरी मिल जाए ताकि अपने माँ,बाप और परिवार के लिए कुछ कर सके.
    इस तरह उसका बचपन और जवानी कब गुजर गई उसे पता ही नहीं चलता, और जवानी के बाद
    वो अपने बच्चो के लिए अब सारे साधन जुटाने में लग जाता है और फिर वही संघर्ष दुबारा सुरु हो जाता है ,बच्चो को सेट करता है उनकी शादियाँ करता है .और जब आराम करने का वक़्त आता है तब तक उसका समय ख़त्म हो चूका होता है,और वो जहाँ से विदा हो जाता है ...
    एक हाथ से देती है दुनियाँ सौ हाथों से ले लेती है,
    ये खेल है कब से जारी ..बिछडे सभी बारी बरी ...मक्

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  3. सब कुछ ठीक है
    अच्‍छा लिखा है
    वर्तनी की गलती अखर रही है
    बचपन को बच्‍चपन नहीं लिखना था
    अन्‍यथा न लें

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  4. हुज़ूर आपका भी एहतिराम करता चलूं.........
    इधर से गुज़रा था, सोचा, सलाम करता चलूं....

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  5. Ek Hakikat ek sachayee se bharpoor sabd sanyojn..bahut khoob........isi tarah likhty rahiye........

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