
दीपावली ऐसा त्योहार है जिसके बारे में सोचने मात्र से आखोँ के सामने
ढेर सारे जगमगाते दीए जलने जलने लगते हैं।
ऐसा लगता है मानो आसमान से तारे जमीं पर आ गएं हों।
चारो तरफ रौशनी ही रौशनी दिखाई देती है।
हर कोई यही सोच कर अपने घर को अच्छे से अच्छा सजाने की कोशिश करता है
कि इस बार लक्ष्मी जी हम पर मेहरबान हो जाए।
और हमारा घर धन धान्य से भरा रहे। हम हर कोशिश करते हैं लक्ष्मीजी को खुश करने की
घर को सजाने से लेकर पूजा की तैयारी तक।
दीवाली एक ऐसा त्यौहार है जिसके आने पर बच्चे बहुत ज्यादा खुश होते हैं
इनकी दीवाली चार पाँच दिन पहले ही शुरु हो जाती हैं।
जिधर देखो उधर से ही पटाखे की आवाज आनीं शुरु हो जाती है।
और इन शोरों से किसी को तकलीफ तो
किसी को खुशी मिलती है।
ढेर सारे जगमगाते दीए जलने जलने लगते हैं।
ऐसा लगता है मानो आसमान से तारे जमीं पर आ गएं हों।
चारो तरफ रौशनी ही रौशनी दिखाई देती है।
हर कोई यही सोच कर अपने घर को अच्छे से अच्छा सजाने की कोशिश करता है
कि इस बार लक्ष्मी जी हम पर मेहरबान हो जाए।
और हमारा घर धन धान्य से भरा रहे। हम हर कोशिश करते हैं लक्ष्मीजी को खुश करने की
घर को सजाने से लेकर पूजा की तैयारी तक।
दीवाली एक ऐसा त्यौहार है जिसके आने पर बच्चे बहुत ज्यादा खुश होते हैं
इनकी दीवाली चार पाँच दिन पहले ही शुरु हो जाती हैं।
जिधर देखो उधर से ही पटाखे की आवाज आनीं शुरु हो जाती है।
और इन शोरों से किसी को तकलीफ तो
किसी को खुशी मिलती है।
हमारे मन में ढेर सारी इच्छाएं रहती हैं जिन्हे हम चाहते हैं कि माँ लक्ष्मी पूरी करें।
उन के सामने अपनी सारी इच्छाएं रख कर उन्हें पूरा करने की कामना करते हैं।
और माँ भी कभी अपने भक्तों को निराश नहीं करती।
उन्हे खुश होने के लिए कुछ ना कुछ ज़रुर देतीं हैं
ज़रुरत है बस दिल से माँगने की।
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